Moral Stories

Ego is The Worst Addiction

सबसे ख़राब नशा अहंकार है!


moral story in hindi

         
               कहानी एक टीचर की है जो एक छोटे से गांव में पढ़ाते थे उनकी लाइफ में सब कुछ ठीकठाक चल रहा था | उनका एक बेटा था जिसकी पढ़ाई पूरी होने वाली थी और एक  बेटी थी जिसकी उम्र शादी की हो चली थी, पत्नी थी | यानी कि कुल मिलाकर तीन लोगो का खुशहाल परिवार था | पर कहते हे न हर दिन एक जैसे नही रहते | सुख-दुख एक दुसरे के पूरक है | मास्टर जी कुछ दिनों से सोचने लगे की यह परिवार मेरी वजह से खुश और मेरी मेहनत की कमाई से सबका गुजारा चल रहा है | मेरे समझ और हुनर से ही परिवार में खुशिया है! वरना सबका बुरा हाल हो जाता | बस यही ख्याल आते ही परिवार में कलह होना शुरू हो गयी, जिसने  सबकुछ तबाह कर दिया | 
              मास्टर जी रोज रोज घर वालो को अहसास दिलाने लगे कि मैं हूं तो तुम  लोग जी पा रहे हो वरना जिंदगी तबाह हो जाएगी बर्बाद हो जाएगी तुम सबकी | धीरे-धीरे यह ख्याल कब घमंड में बदल गया मास्टर जी को पता ही चला | काफी दिनों बाद वो अपने बारे में सोच रहे थे कि हर इंशान में कुछ गुण और कुछ अवगुण होते है, परन्तु मुझमे तो कोई अवगुण नही है | अब  तो उनको लगने लगा की वो सर्वश्रेष्ठ शिक्षक भी है क्योंकि हर टीचर अक्सर उनसे कुछ न कुछ पूछता रहता था | मास्टर जी का अब हर दिन घमंड बढता ही जा रहा था | तभी एक दिन गांव में एक महात्मा का प्रवचन था | जिसे सुनने के लिए मास्टर जी भी पहुंचे तो प्रवचन में जो  टॉपिक चल रहा था वह घमंड ही था |
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            स्वामी जी  बता रहे थे कि दुनिया में किसी को भी घमंड नहीं करना चाहिए हमें नहीं सोचना चाहिए कि मेरी वजह से मेरे घर में सब लोग खुश हैं मेरी वजह से ऑफिस चल रहा मेरी वैसे कंपनी चल रही मेरी वजह से देश चल रहा है दुनिया चल रही है | दुनिया में कई लोग आए कई लोग चले गए लेकिन देश दुनिया वैसी की वैसी है बढ़िया  रहती है और  खुश  रहती है | कभी-कभी चुनौतियां भी आ  जाती है लेकिन हमें यह सोचना बंद करना चाहिए क्योंकि घमंड राजा रावण का भी नहीं चला |  
                बाबा जी ने अपनी बात पूरी की, प्रवचन खत्म हुआ तो यह बात सुन मास्टर जी  बाबा जी के पास जा पहुंचे और बोले कि महाराज बड़ा अच्छा लगा | आज इत्तेफाक से जो विषय था प्रवचन का वही मेरी समस्या है | जिसके वजाह से  में परेशान हूं, मै  घमंडी हो गया ! मैं खो गया हूं ! सवाल है यह है मेरा आपसे कि मुझे लग रहा है कि मेरी वजह से मेरे घर चल रहा है | मेरी वजह से घर में हर कोई खुशी से जी रहा है अगर मैं चला गया तो लोग परेशान होंगे बर्बाद हो जाएगी इनकी लाइफ तबाह हो जाएगी यह दुखी हो जाएंगे|
                यह सब सुन कर बाबाजी ने कहा कि तुम्हारे घमंड का बड़ा सरल उपाय है मेरे पास | एक काम करो तुम 2 साल के लिए इस गांव को छोड़ कर के शहर चले जाओ वहां जाकर के नौकरी करो वहां पैसा कमाओ और यहां की चिंता छोड़ दो लेकिन बिना बताए जाना | बाबा जी की बात मास्टर जी ने मान ली थी और मास्टर साहब चले गए शहर में | 
              बाबा जी ने गांव में बात फैला दी कि भैया एक शेर आया हमारे आश्रम में और आ करके हमारे भक्तों को उठाकर के ले गया, उसमे से एक की मौत हो गई वह जो भक्त था वह टीचर था तोबा | टीचर की फैमिली को यह बात मालूम चली, मास्टर साहब की फैमिली में सब दुखी हो गए | दुख का पहाड़ टूट पड़ा | सब जान पहचान वाले परेशान थे | बड़ा बुरा हुआ लेकिन गांव वालों ने कहा कि आप, भाभी जी चिंता मत कीजिए हम सब कुछ ठीक कर देंगे | 
                गांव वालों ने पैसा इकट्ठा किया और बेटी की शादी करवा दी मास्टर साहब की बेटी की शादी धूमधाम से हो गई | जो बेटा था उसकी पढ़ाई पूरी हो गई थी उसने सरकारी परीक्षा की तैयारी की और परीक्षा पास कर उसकी भी सरकारी नौकरी लग गई 2 साल के अंदर सब कुछ वैसा ही वापस हो गया जैसा पहले था 2 साल के बाद में मास्टर साहब वापस शहर से आते हैं  | अपने गांव में रूप बदलकर लोगो से मास्टर जी के बारे में पूछते है और सबसे यही पता चलता है की सब ठीक है | इसके बाद खुद अपने घर जाकर  देखते हैं कि उनके घर में हो सब कुछ ठीक चल रहा है घर वाले उस संकट से उबर चुके थे | 
                मास्टर साहब को समझ में आ गया कि दुनिया में किसी के भी होने न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता | किसी के रहने से, काम करने से काम नहीं चलता सब इंसान इस दुनिया में अपनी किस्मत अपनी मेहनत से खा रहे हैं , फिर क्या था मास्टर जी घर गये और सभी घर वालों से माफी मांगी घर वाले अचानक मास्टर जी को देख चौक गये और उन्हें कुछ समझ नही आया की मास्टर जी ने ऐसा क्यों किया ? तब मास्टर जी ने  बाबा जी के उपाय के बारे में बताया | बाबा जी के उपाय से ही में अपने अहंकार से छुटकारा पा सका | अब मुझे समझ आ गया हे की कोई किसी पर बोझ नही है और न ही कोई किसी के लिए कुछ करता है | हर व्यक्ति अपने करम और भाग्य से अपना जीवन जीता है |
अतं में आप सभी को भी यही बात मन हे रखनी चाहिए की कभी भी अपनी  अच्छाई पर अहंकार नही करना चाहिए |

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प्रिय पाठको
आप सभी को हमारा  हृदय से नमस्कार !
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