Top 10 Moral stories in Hindi For Kids

 Moral Stories in Hindi for Class 5

         Hello, बच्चो आपको इस पोस्ट पर Moral Stories in Hindi for Class 5 का बेस्ट कलेक्शन मिल जायेगा | जिसे पड़कर आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा | सारी हिंदी कहानिया एक से बढकर एक है, जिसके अंत में उस कहानी का moral भी आपको बताया गया है | तो चलो कहानिया पढना शुरू करते है –

Top 10 Moral stories in Hindi For Kids :-

  1. Pigeon and Rat (कबूतर और चूहा-दोस्ती की कहानी )
  2. Tit For Tat (जैसे को तैसा-धोखे की सजा )
  3. The Foolish Donkey (मूर्ख गधा और बूढ़ा शेर की कहानी  )
  4. The Golden Swan (सुनहरा हंस-लालची औरत की कहानी )
  5. Foolish Priest (मूर्ख ब्राम्हण और ठगों की कहानी )
  6. Foolish Crow and Cunning Fox (मूर्ख कौआ और चतुर लोमड़ी)
  7. Blue Jackal (नीला सियार )
  8. Powe Of Rumour (अफवाह की ताकत)
  9. The Hidden Treasure (छिपा खजाना मेहनत की कमाई  )
  10. The Clever Goat (चतुर बकरी और शेर की कहानी )

कबूतर और चूहे की दोस्ती कहानी 

एक दिन एक कबूतरों का झुंड जंगल के उपर मंडरा रहा था | तभी उन्होंने ज़मीन पर कुछ दाना बिखरा देखा | सभी ज़मीन पर उतर आये और दाना चुगने लगे | उन्होंने दाने के उपर पड़े जाल को नही देखा और वे सभी जाल में फंस गये | 

एक दिन एक कबूतरों का झुंड जंगल के उपर मंडरा रहा था | तभी उन्होंने ज़मीन पर कुछ दाना बिखरा देखा | सभी ज़मीन पर उतर आये और दाना चुगने लगे | उन्होंने दाने के उपर पड़े जाल को नही देखा और वे सभी जाल में फंस गये 

Moral Stories in Hindi for Class 5

    एक दिन एक कबूतरों का झुंड जंगल के उपर मंडरा रहा था | तभी उन्होंने ज़मीन पर कुछ दाना बिखरा देखा | सभी ज़मीन पर उतर आये और दाना चुगने लगे | उन्होंने दाने के उपर पड़े जाल को नही देखा और वे सभी जाल में फंस गये | 

    उन्हें जाल में फंसा देख बहेलिया बहुत ही ज्यादा खुश हुआ | “ इतने सारे पंछी एक साथ फंस गये , आज तो मेरी कमाई पूरी हो गयी | ” ऐसा होने के बाद उसने पहले सोचा और निश्चय किया कि बह भोजन खाकर पंछियों को बेचने बाज़ार ले जायेगा | 

    सभी कबूतर अपने आपको आजाद करवाने के लिए जी जान लगाकर , पूरी ताकत के साथ अपने पंख फरफरा रहे थे कि किसी तरह उनकी जान बच जाये तभी कबूतरों के मुखिया ने कहा – “अब हम सबको मिलकर काम करना पड़ेगा ” क्योकि एकता में बहुत शक्ति होती हे और हर मुश्किल काम को बड़ी आसानी से पूरा किया जा सकता हे |

    ऐसा कहकर मुखिया ने सबसे कहा में जैसे ही पांच तक गिनती गिनुगा उसके साथ ही हम सभी को जोर लगाकर उड़ जाना है | गिनती के साथ ही सभी कबूतर जाल में फंसे फंसे ही उड़ गये और वे सभी इसमें कामयाब भी हुए | कबूतरों का झुंड काफी देर तक उड़ता रहा फिर एक चूहे के बिल के पास उतरा | कबूतरों के मुखिया ने अपने दोस्त चूहे को पुकारा |

     चूहा झट से अपने परिवार सहित वहा आया और सबने फटा फट जाल काटकर कबूतरों को आजाद कर दिया |


जैसे को तैसा(Hindi Kahaniya With Moral)

भोला और शरद बहुत अच्छे दोस्त थे | अभी अभी भोला अपनी काफी धन-दौलत और जायदाद आदि गवा चूका था और वह बहुत उदास था | यह सब होने से वह एक बड़े शहर में जाकर अपनी किस्मत अजमाना चाहता था | भोला के पास काफी सारे लोहे के पुराने बर्तन थे | 

    उन्हें लेकर वह शरद के घर आया और उससे विनती की कि वह उसके लौटकर आने तक उन बर्तन को अपने पास हिफाजत से रख ले | एक साल गुजर जाने के बाद जब भोला ने वापस आकर शरद से जब अपने बर्तन मांगे तो उसने कहा , मित्र वो सारे बर्तन तो चूहे खा गये | 

Moral Stories in Hindi for Class 5

    यह सुनकर भोला बहुत दुखी हुआ और उसे पता था की उसका दोस्त शरद उसे झूठ बोल रहा हे परन्तु उसने कुछ नही कहा और चुपचाप वहा से चला गया | कुछ दिन बाद उसने शरद से कहा कि वह अपने बेटे को उसके साथ भेज दे | उसने बताया कि वह बाहर से उसके लिए लाय गये उपहार उसे देना चाहता है | 

    उपहार का नाम सुनते ही शरद ने फटाफट अपने बेटे को भोला के साथ भेज दिया | समय गुजरता गया और रात हो गई परन्तु शरद का बेटा वापस नही आया | शरद काफी चिंता में था तभी शरद और उसकी पत्नी भागे भागे भोल के घर पहुचे और पूछा की हमारा बेटा कहा है ? भोला ने बताया की बहुत गजब हो गया, उसने बताया की घर वापस आते समय एक चील उनके बेटे को उड़ाकर ले गई | 

    शरद बहुत गुस्सा हुआ और उसको समझने में देर न लगी की भोला उससे बदला ले रहा है | वह न्याय मागने राजमहल जा पंहुचा | राजा ने उन दोनों को एक साथ मिलने के लिए दरबार में बुलाया | राजा ने भोला से पूछा, “ दस वर्ष के एक लड़के को चील उड़ाकर कैसे ले जा सकती हे ?” भोला ने झट से जबाब दिया, “महाराज जब लोहे के बर्तन को चूहे खा सकते है ठीक उसी प्रकार चील भी आसानी से लड़के को उड़ाकर ले जा सकती है |” 

    यह सुनकर शरद अपने आप पर बहुत शर्मिंदा हुआ उसने अपनी गलती स्वीकार की और उसने भोला को उसके सारे बर्तन वापस कर दिए | अगले दिन उसे अपना बेटा वापस मिल गया |


मूर्ख गधा और बूढ़ा शेर की कहानी

बच्चों यमुना नदी के किनारे एक बहुत बड़ा जंगल था | जिसका राजा शेर वहा बहुत लम्बे समय तक शान ने राज करता था और मनचाहा शिकार उसे मिल जाता था | पर समय के साथ-साथ उसकी उम्र भी डलती गयी जिसके परिणाम स्वरुप- “शेरखां, सिंह अब काफी बूढ़ा हो चुका था | वह शिकार नही कर सकता था इसलिए काफी दिनों तक उसे भूखा रहना पड़ता था | 

    इससे वह काफी दुखी था| एक दिन उसने सोचा कि जल्द से जल्द कोई ऐसा उपाय खोजना होगा जिससे उसे घर बैठे प्रतिदिन भोजन मिल सके वरना में ज्यादा दिन भूखे जिन्दा नही बच पाउगा| वह यह सब सोच ही रहा था की तभी उसकी नज़र वहा घूमते हुए रंगा नाम के सियार पड़ी और उसने रंगा सियार को अपने पास बुलाया|  

Moral Stories in Hindi for Class 5

    सियार ने आते ही सबसे पहले नमस्कार किया |शेरखां ने कहा, “ मै तुम्हे ही ढूंढ रहा था | मैंने तुम्हारी बुद्धिमानी के बहुत सरे किस्से सुने है| मै तुमसे काफी प्रस्सन हूँ| “मै अपने लिए प्रधानमंत्री नियुक्त करना चाहता हूँ| काबिलियत के हिसाब से तुम्हे मेरा प्रधानमंत्री होना चाहिए| वैसे तुम्हे मेरे भोजन का भी ध्यान रखना पड़ेगा |”

    रंगा काफी चालक सियार था| रंगा ने झट से कहा, “यह तो मेरा सौभाग्य हे महाराज| मै अभी जाकर आपके लिए भोजन का इन्तेजाम करता हूँ| यह बोलकर रंगा वहा से चला गया| रंगा बहुत ही चलाक सियार था और तभी उसे एक गधा गास चरते हुए दिख गया फिर क्या उसके दिमाग की बत्ती जली और वह गधे के पास जा पंहुचा| 

    वह गधे से बोला, “श्रीमान, हमारे राजाधिराज महाराज शेरखां आपको अपने साम्राज्य का प्रधानमंत्री बनाना चाहते है|” यह सुनकर गधा हैरान रह गया और उसने पूछा “मै क्यों?” तभी रंगा सियार बड़े अदब से बोला, “तुम मेहनती हो, बुद्धिमान हो और प्रधानमंत्री बनने लायक हो,”| अपनी तारीफ सुनकर गधा बहुत खुश हुआ और रंगा के साथ शेर से मिलने चल पड़ा| 

    जैसे ही गधा तथा रंगा शेर की मादं मे घुसे शेरखां उस पर झपटा| गधा डरकर ढेचू- ढेचू करता भाग गया| रंगा ने शेर से कहा, “क्या महाराज आपने उसे डरा दिया| मै उसे फिर से लाने की कोशिश करता हूँ |” रंगा ने जाकर फिर से गधे को बहला फुसला कर शेरखां से मिलने के लिए मना लिया | दुबारा जैसे ही गधा मादं में घुसा, शेरखां ने उसको दबोचकर मार दिया| 

    रंगा भी भूखा था उसने शेरखां को हाथ मुह धोकर आने को कहा | जैसे ही शेरखां गया सियार ने गधे के सिर में से दिमाग निकालकर खा लिया| लौटने पर शेरखां ने पूछा, “मेरा शिकार किसने छुआ था? सियार डर गया की पकड़ा गया तो शेर मुझे भी मारकर खा जायेगा|” उसने दिमाग लगाया और बोला महाराज किसी ने हाथ नही लगाया | उसने शेर से पूछा क्या हुआ महाराज| 

    शेर ने बोला इसका दिमाग कहा है जब इसे किसी ने नही छुआ तो | रंगा सियार ने चालाकी से उत्तर दिया, “इस गधे का भेजा नही है| महाराज आप खुद सोचिये अगर गधे का दिमाग होता तो क्या वह दूसरी बार वापस आता?|” ऐसा बोलकर सियार वहा से मुस्कुराते हुए चला गया |

सुनहरा हंस-लालची औरत की कहानी

एक हंस था, जिसके पंख सुनहरे थे| वह एक तालाब में रहता था| उस तालाब के पास ही एक बूढ़ी औरत अपनी दो बेटियों के साथ रहती थी| परिवार पड़ोसियों की दया पर पल रहा था| हंस ने देखा कि बुढ़िया का जीवन कितनी कठिनाई से बीत रहा था|

हंस ने सोचा- “अगर मैं इसे एक-एक पंख देता हूँ, तो वह उसे बाज़ार में बेच कर धन कमा सकती है| इस तरह वे सुख से जीएगे|” एक दिन हंस उड़ा व उनके घर की टूटी-फूटी छप्पर वाली छत पर आ बैठा| उसे देख बुढ़िया बोली- “यहाँ क्या लेने आये हो? हमारे पास तुम्हे देने के लिये कुछ नहीं है|”

हंस ने कहा- “मैं तुम्हें सुनहरी पंख देने आया हूँ| तुम इसे बेच कर धन कमा सकती हो| मुझसे तुम्हारी ख़राब हालत देखी नही जाती|” यह कहकर हंस ने एक सुनहरा पंख झाड़ा और वहाँ से उड़ गया| वह हर सप्ताह उस बुढ़िया के लिए एक सुनहरा पंख छोड़ जाता|

Moral Stories in Hindi for Class 5

जल्दी वह गरीब औरत अमीर हो गयी| वह अपनी दो बेटियों के साथ सुख-चैन से रहने लगी, लेकिन वह बुढ़िया काफी लालची हो गयी थी| वह जल्दी से जल्दी सारे सुनहरे पंख पाना चाहती थी| एक दिन उसने बेटियों से कहा, “हम नही जानते कि हंस हमारी मदद के लिए कब तक आता रहेगा| अगली बार जब वह आयेगा तो मैं उसके सारे पंख नोच लूंगी|”

मायूस लड़कियों ने माँ को सलाह दी- “कृपया ऐसा मत करना, इससे तो हंस को चोट पहुचेगी|” लेकिन बुढ़िया ने तो पंख नोचने का पक्का फैसला कर लिया था|                              

अगली बार हंस आया तो बुढ़िया ने उसे पकड़ लिया व सारे पंख नोचने शुरू कर दिए| उसने यह भी नही सोचा कि हंस को कितनी तकलीफ हो रही होगी| तभी उसे यह देख कर झटका लगा कि नोचे गए सुनहरे पंख सादे पंखो में बदल गय थे|

सुनहरे हंस ने कहा- “मैं तुम्हारी मदद करता था पर तुमने मुझे मारना चाहा| अब मेरे पंख साधारण पंखो से ज्यादा कुछ नहीं हैं| मैं यहाँ से जा रहा हूँ और कभी नही लौटूगा|”

बुढ़िया ने अपने किये की माफ़ी माँगी, पर बहुत देर हो चुकी थी| सुनहरे हंस ने कहा- “दुबारा अब कभी लालच मत करना”, और उड़ गया|

मूर्ख ब्राम्हण और ठगों की कहानी

 एक छोटा सा गावं था| वहाँ एक गरीब ब्राम्हण रहता था | एक दिन उसे पड़ोस के गावं से पूजा करने के लिए बुलाया गया| वहाँ उसे खाना, कपड़े और एक बकरी भेट में मिले | वह बहुत खुश हुआ | ब्राम्हण ने बकरी को कंधे पर लादा और सारा सामान समेट कर अपने घर की और चल दिया |

    कुछ ठगों ने उसे इतना सारा सामान ले जाते देख लिया फिर क्या था उन सभी ने मिलकर उससे बकरी हथियाने की सोची | एक ठग उसके पास आया और बोला – “भाई तुम तो इतने बुद्धिमान हो पर मरा हुआ बछड़ा कंधे पर उठाकर क्यों चल रहे हो ?” ब्राम्हण ने बकरी की और देखकर कहा, “यह मरा हुआ बछड़ा नही है| यह तो जीती जागती बकरी है| 


Moral Stories in Hindi for Class 7

    उस ठग ने मुह बिचकाया और चल दिया | ब्राम्हण भी आगे चल पड़ा | कुछ दूर चलते ही उसे दूसरा ठग मिला वह उसके सामने से निकला और बोला –“ वाह! क्या बात है, एक ब्राम्हण कुत्ते को कंधे पर बैठाकर ले जा रहा है|” 

    ब्राम्हण गुस्से से बोला- तुन्हें दिखाई नही देता , यह कुत्ता नही बकरी है, जाओ यहाँ से |” ठग ने अपना सर झटकाया और चला गया | कुछ ही देर हुए थे चलते हुए ब्राम्हण को की तभी तीसरा ठग उसे मिला | अरे ये क्या एक ब्राम्हण गधे को कंधे पर उठाकर ले जा रहा है | 

एसा तो कभी नही देखा| आज तो यह देखकर मज़ा आ गया| ब्राम्हण गुस्से से जल्लाते हुए बोला, 

“यह गधा नही बकरी|”

    ठग हँसता हुआ चला गया, “एक बुद्धू ही गधे को बकरी कह सकता है!” ब्राम्हण अब परेशान हो चूका था| “मुझे लगता है जरूर कोई गड़बड़ है| तीन-तीन लोगो ने इस पशु के बारे में कहा कि में बकरी नही ले जा रहा| लगता है किसी राक्षस ने इस पशु का रूप धारण कर लिया है और मुझे सता रहा है |” 

उसने जमीन पर उस बकरी को उतार दिया और से भाग गया| सभी ठग जो झाडियों के पीछे झिपे यह सब देख रहे थे उन्होंने बकरी उठा ली और चल दिए| 


मूर्ख कौआ और चतुर लोमड़ी की कहानी

 दोस्तों यह कहानी एक कौए की है | एक गाव में एक कौआ रहता था | वह दिमाग से तोड़ा पैदल था | कहने का तात्पर्य यह है की वह कौआ बनता तो बहुत समझदार था परन्तु वह था नही |

         एक दिन की बात है वह भर से इधर-उधर घूम रहा था तभी उड़ते –उड़ते उसे एक डबल रोटी का टुकड़ा मिला | वह उसे देख बहुत खुश हुआ क्योकि दिन भर से भटकते –भटकते उसे जोर की भूख भी लग रही थी | 

        फटाफट कौआ ने उसे अपनी चोंच में लेकर एक पेड़ की निचली सी डाल पर बैठ गया | Foolish Crow उसे खाने ही जा रहा था तभी एक लोमड़ी वहाँ से गुजरी | उसने कौए के मुहं में डबल रोटी देखी | लोमड़ी ने सोचा, इस डबल रोटी को तो किसी तरह हथियाना ही पड़ेगा | 

Moral stories in Hindi For Kids

       

        लोमड़ी थी होशियार उसे डबलरोटी हथियाने का Idea मिल गया | वह पेड़ के नीचे बैठ गयी और कौए से बात करने की कोशिश करने लगी | “वह बोली, ओह, सुंदर कौए! तुम कहा से आये हो ?”

        लोमड़ी बड़ी चालाकी से उससे बात करने की कोशिश करने लगी | लोमड़ी अब और बड़ा चड़ाकर उसकी तारीफ करने लगी | कोए को सुंदर आज तक किसी ने नही कहा था | सब  Foolish Crow को काला काला कह कर ही उसका मजाक उड़ाते थे | इसलिए Foolish Crow धीरे धीरे डबलरोटी खाता रहा और मन ही मन सोचने लगा, “क्या मैं सचमुच मैं सुन्दर हूँ?”

        लोमड़ी ने फिर एक बातों का तीर छोड़ा “ तुम्हारे जैसे सुन्दर पक्षी की तो आवाज़ भी बहुत सुन्दर होगी!” तुम जरूर बहुत मधुर गाते होगे | कृपया एक मीठी सी धुन मुझे भी गा कर सुना दो | लोमड़ी उसकी बड़ाई करती ही जा रही थी | Foolish Crow अब सचमुच में उसकी चापलूसी को सच समझने लगा | 

         Foolish Crow लोमड़ी की झूठी मनभावन बातों में आ गया | लोमड़ी ने फिर कहा “ अरे, अब ज़रा सुना भी दो गाना !” इस बार Foolish Crow अपने आपको रोक नही पाया और उसने जैसे ही गाना गाने के लिए अपनी चोंच खोली डबलरोटी सीधे लोमड़ी के मुह में जा गिरी | 

        Foolish Crow बस आगबबूला हुआ लोमड़ी को देखता रह गया पर कुछ कर नहीं सका | लोमड़ी की चाल कामयाब हुई और वह डबल रोटी खा कर खुशी खुशी वहां से चली गयी |

Moral Of The Story 

  1. हमेशा झूठी तारीफ करने वालो से दूर रहे 
  2. अनजान लोगो की चापलूसी भरी बातों में कभी न आये 
  3. अपनी अच्छाई और बुराई को पहचानना सीखे 
  4. खाना खाते समय किसी की बात में ध्यान न दे


नीला सियार(Moral Stories in Hindi for Class 5)

एक भूखा सियार घूमते-घूमते एक गाव में जा पंहुचा| वहां के कुत्ते उसके पीछे पड़ गये | सियार कुत्तो से बचने के लिए भागा और नीले रंग से भरे एक तसले में जा गिरा , और जब वहा से बाहर निकला तो वह पूरी तरह से नीला हो गया था |

        सियार नीले रंग से रंगा हुआ जंगल जा पंहुचा| जंगल के सभी जानवर उसे अपने बीच पाकर बहुत हैरान थे | उन्होंने ऐसा नीला जानवर पहले कभी नही देखा था| सियार यह देखकर काफी खुश हुआ और उसके मन में शैतानी ख्याल आया कि क्यों न इस बात का फायदा उठाया जाये| 

        फिर क्या था नीला सियार काफी ऊँची चट्टान पर जाकर बैठ गया और उसने सभी जानवरो से कहा, “भगवान ने मुझे बनाया है और विशेष तोर पर तुम सब लोगो की रक्षा के लिए यहाँ भेजा है|” मै तुम्हारा राजा हूँ| तुम लोग मेरे प्रति अपना आदर और प्यार दिखाने के लिए प्रतिदिन मेरे लिए भोजन लाओगे| 

Moral stories in Hindi For Kids

        

        सारे जानवरों ने उसकी बात सच मान ली क्योकि वह अनोखा जानवर लग रहा था | फिर क्या था सियार के जलबे शुरु हो गये और ऐसे ही सियार के प्रतिदिन मजे से गुजरने लगे| उसे रोज बिना कुछ करे बढ़िया भोजन मिल जाता था| परन्तु कहते है न की झूठ की उम्र ज्यादा लम्बी नही होती है और सच कभी नहीं छुपता| 

        एक दिन , उसने कुछ जानी-पहचानी आवाजे सुनी | ये सियारों के समूह की मिली-जुली पुकारने की आवाज थी| कुछ समय के लिए वह भूल गया अब वह जंगल के राजा होने का नाटक कर रहा है | उसने भी अपनी असली आवाज में पुकारना शुरु कर दिया| 

        उसकी आवाज अन्य सियारों जैसी ही थी, जिसे सुनकर जंगल के सारे पशु हैरान रह गये | उन्हें सारा माजरा समझ आ गया और उसका भांडा फूट गया | यह तो पूरा जालसाज है | चालक सियार कही का| 

        इसने हमें काफी देर तक बुद्धू बनाया है, सिंह यह कहकर उसे मारने के लिए उसकी तरफ भागा| साथ ही साथ सही जानवर हाथी, जिराफ, भालू एवं अन्य उसके पीछे भागे और उन्होंने सियार को जंगल से खदेड़ कर भगा दिया|

अफवाह की ताकत

 एक बार जंगल में खरगोश नारियल के पेड़ के नीचे आराम कर रहा था | तभी तेज़ आवाज के साथ धढ़ाम से कुछ नीचे आ गिरा | खरगोश इस अजीब सी आवाज को सुनकर डर गया | उसे लगा की भूकंप आने वाला है,सारी दुनिया खत्म होने जा रही है और वह भी मारा जायेगा | उसने सोचा अगर धरती फटेगी तो मेरा क्या होगा?

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उसने रहा न गया और अगले ही पल वह उछल कर भागा और कहने लगा-“धरती फट रही है! धरती फट रही हैं!” रास्ते में दुसरे खरगोश ने पूछा-“तुम भाग क्यों रहे हो ?”

“तुम भी भागो, धरती फट रही हे| दुनिया ख़त्म होने वाली है| सब खत्म हो जायेगे|” खरगोश ने जबाब दिया|

यह सुनते ही दूसरा खरगोश उससे भी तेज़ी से भागने लगा| साथ ही साथ वह जोर-जोर से चिल्लाते भी जा रहा था- “धरती ख़त्म हो रही है, सब ख़त्म हो जायेगे! धरती फटने वाली है”| यह सुन जल्दी ही जंगल के सारे खरगोश डर के मारे भागने लगे|

जंगल के दूसरे जानवर भी यह चिल्ला चोट सुन कर घबरा गये| जंगल की आग की तरह यह खबर चारो तरफ फैल गई थी- धरती फट रही है! सब खत्म होने वाला है! सारे जंगल में अफरा तफरी मची थी| जंगल के सारे जानवर, रेंगने वाले,जीव-जंतु, कीड़े-मकोड़े, पशु-पक्षी सभी अपने-अपने घरों से निकल कर भाग रहे थे| चारो और उनकी डरी हुई आवाजे गूँज रही थी|

जंगल के राजा शेर ने जब यह हो हल्ला सुना, उस समय वह आराम कर रहा था| वह अपनी गुफा से निकल आया और देखा की जानवर डर के मारे यहाँ वहाँ भाग रहे है| उसने पूछा- “क्या हुआ? तुम सब भाग क्यों रहे हो?”

पास ही चट्टान पर बैठे तोते ने कहा- महाराज! धरती फटने वाली है| कृपया आप भी भागे-“तुमसे यह सब किसने कहा?” शेर दहाडा “मैंने बंदरो से सुना” तोते ने हिचकते हुए कहा|

बंदर बोले की उन्होंने चीतों से सुना, चीता ने कहा की हाथियों ने बताया था, इस तरह से एक के बाद एक सब उन खरगोश तक जा पहुचे, जिन्होंने सबसे पहले यह खबर फैलाई थी|

शेर ने खरगोशो से पूछा- “नन्हे जीव! तुमने क्या देख कर सोचा की धरती फटने वाली है|” खरगोस ने डर से कापते हुए कहा|

महाराज! जब मै पेड़ के नीचे सो रहा था तो बड़ी तेज़ आवाज के साथ वहाँ कुछ गिरा था| मैंने खुद वह धमाका सुना था|

शेर ने तुरंत जाँच-पड़ताल करने का हुक्म दिया| खरगोश उसे उस नारियल के पेड़ के नीचे ले गया, जहा वह आराम कर रहा था| शेर ने दूर से देखा, जमीन पर दो नारियल गिरे पड़े थे| वह झट से समझ गया की चट्टान पर वे नारियल गिरने से कुछ पत्थर के टुकड़े नीचे आ गिरे होंगे |

शेर ने सभी जानवरों को तसल्ली दी और कहा-

“अपने-अपने घर लौट जाओ और आराम से रहो| धरती पूरी तरह से सही सलामत है”

नन्हे खरगोश ने अपनी मुर्खता के लिए शेर और सभी जानवरों से माफ़ी माँगी|

शिक्षा- बिना सोचे समझे दूसरो की बात का यकीन न करें |  

छिपा खजाना मेहनत की कमाई 

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        वाराणसी नगर में एक भिश्ती रहता था| वह लोगों के घरों में पानी पहुचाता था| पूरा दिन कड़ी मेहनत करने के बाद भी गुजारा मुश्किल से होता था| काफी गरीबी में उसके दिन काट रहे थे|

       एक दिन उसने एक व्यापारी के घर सारा दिन मेहनत करके टनो भर पानी पहुचाया| उन्होंने उसे बदले में एक सोने का सिक्का दिया| वह उसे पाकर बेहद खुश हुआ| उसने स्वयं से पूछा-“मुझे इस खजाने को कहाँ छुपाना चाहिए?”

       वापसी पर उसे राजा का महल दिखा| उसने सोचा, हाँ! महल की इन ईटों के पीछे मेरा खजाना सुरक्षित रहेगा| उसने दीवार से एक गीली ईट निकाली व सिक्का उसके पीछे रख दिया| यह उनकी द्वार की बाई दीवार की ईट थी|

       कई साल बीत गये| उसका विवाह हुआ| उसने महल के दक्षिण द्वार के पास ही झोपड़ी बना ली| पति-पत्नी उस कुटिया में ख़ुशी-ख़ुशी रहने लगे| एक दोपहर उसकी पत्नी बोली-“शहर में एक मेला है| अगर हमारे पास पैसे होते तो में भी उसका मज़ा लेती|”

भिश्ती अपनी पत्नी का दिल नही तोड़ना चाहता था| उसने कहा-“उदास मत हो| मैंने महल की एक दीवार में सोने सिक्का छिपा रखा है| मैं उसे ले आता हूँ, फिर हम दोनों मेले में चलेगे|”

       इसके बाद वह कड़ी दोपहर में कुटिया से निकल पड़ा ताकि अपना छिपा खजाना निकल सके| राजा अपने महल के बरामदे में विश्राम कर रहे थे| उन्हें यह देख कर हैरानी हुई कि एक व्यक्ति धूप से तपती राह पर अकेला चला जा रहा हे और मस्ती में गा भी रहा हैं| उन्होंने सैनिकों को हुक्म दिया की उस युवक को पकड़ लाये|

सिपाहियों ने उससे जा कर कहा-“राजा ने बुलाया है| इसी वक्त साथ चलो|”

भिश्ती ने साथ जाने से इंकार कर दिया| सिपाही उसे जबरन पकड़ ले गए| उसे देख, राजा ने कहा-“धरती तवे की तरह ताप रही है| तुम इतनी कड़ी धूप की परवाह न करते हुए कहा भागे जा रहे हो और गाना भी क्यों गा रहे हो?”

भिश्ती ने जबाब दिया, महाराज! मेरी इच्छा इस धूप से कही तेज़ है|”

       राजा ने आश्चर्य से पूछा-“क्या में तुम्हारी इच्छा जान सकता हूँ, जिसने तुम्हे इतनी धूप में निकलने पर मजबूर किया|”

       “महाराज! मैं महल की उत्तरी दीवार में छिपा अपना खजाना निकालना चाहता हूँ| मुझे अपनी पत्नी को खुश करना है|”

       राजा ने हैरानी से पूछा, “तुम्हारा छिपा खजाना क्या है, एक लाख सोने के सिक्के?”

‘नहीं महाराज, इतना नही है|

“तो पचास हजार?”

‘नही श्रीमान’

       फिर यह सुन कर चौंक गया “क्या, सिर्फ एक सिक्का?””जी, मैं उस एक सिक्के से पत्नी को मेला दिखाने ले जाऊगाँ व कुछ खरीद दूँगा|”

       यह सुनकर महाराज ने उसे सोने का सिक्का देते हुए कहा “भले मानुस! इतनी दोपहर में खजाना निकालने की जरुरत नही हैं| यह सिक्का लो व घर लौट जाओ|”

भिश्ती ने सिक्का तो ले लिया किंतु राजा से बोला-“मैं इसे ले लेता हूँ पर मुझे अपना सिक्का तो पाना ही पड़ेगा|”

राजा ने यह सोचा की उसे और धन चाहिए, वे यह सोच उसे और धन देते रहे पर भिश्ती अपनी जिद पर अड़ा रहा कि वह कड़ी मेहनत से कमाया गया सिक्का लेने अवश्य जाएगा|

अंत में महाराज बड़े दयालु थे, वे नही चाहते थे कि भिश्ती इतनी तेज़ धूप में जाये ,इसलिए उन्होंने कहा-“तुम अपनी हठ छोड़ दो, तो मैं आधा राज्य तुम्हे देने को तैयार हूँ|”

भिश्ती ने विनम्रता से उनकी पेशकश पर हामी भर दी| राज्य देने से पहले राजा ने पूछा|

“तुम राज्य का कौन सा आधा हिस्सा लेना चाहोगे?”

भिश्ती एक पल सोच कर बोला-

“महाराज! मुझे राज्य का दक्षिणी हिस्सा चाहिए|”

       महाराज उसका उत्तर सुन कर हँसे व कहा, “मैं न केवल तुम्हारे धीरज बल्कि बुद्धिमत्ता की भी प्रशंसा करता हूँ|”

        इस तरह भिश्ती को न सिर्फ आधा राज्य मिला, वह दक्षिणी द्वार की दीवार में से अपना छिपा खजाना पाने में भी सफल रहा|


चतुर बकरी और शेर की कहानी

           यह कहानी उमरिया जिले के पास के एक गावं की है | यह वही जगह है जो बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के पास है | बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान बाघों के लिए बहुत प्रशिद्ध है | इस उद्यान में बाघों के अलावा जंगली जानवरों की 200 से अधिक प्रजाति रहती है |

           वही पास के एक छोटे से गाव नयनपुरा  के एक किसान के घर पर चमेली नाम की बकरी अपने तीन बच्चो के साथ रहती थी | वह हमेशा अपने बच्चो को लेकर काफी चिंतित रहती थी | इसकी वजह उसके गाव के पास का जंगली वन था जहा हर प्रकार के जंगली जानवर रहते थे | 

             उसे इसी बात का डर हमेशा सताता रहता था कि किसी दिन उसके बच्चे कही उस जंगल में खेलते खेलते न चले जाये ! और किसी जानवर का निवाला न बन जाये |

           वैसे तो चमेली बकरी अपने बच्चो का पूरा ख्याल रखती थी और उन्हें समय समय पर गाइड भी करती थी की उनमे से कोई भी जंगल में न जाये | पर कहते है न बच्चे तो बच्चे होते है | 

            एक दिन बकरी के एक बच्चे ने किसान के बेटे और भेड़ को आपस में यह बात करते हुए सुन लिया की पास वाले जंगल में बहुत सारी हरी हरी घास  और हरे भरे पेड़ पोधे है | किसी दिन वहा ले जाकर तुम्हे खूब घास खाने को मिलेगी |
फिर देर कहा लगने वाली थी शरारती बकरी का बच्चा यह बात सुन हरी हरी घास को देखने की wish के साथ दबे पैर जंगल की ओर चल पड़ा |

           चमेली को जब इस बात का अहसास हुआ तो वो बहुत चिंतित हो गयी और उसे डूड़ने निकल पड़ी | बकरी का बच्चा जब तक खेलते खेलते जंगल पहुँच चुका था | बकरी के बच्चे का ध्यान खेल से हटा ही था की उसे तीन चार Hyenas ( लकड़ बग्गो ) ने घेर लिया | 
            जिन्हें देख कर बकरी का बच्चा डर गया और जोर जोर से रोने लगा और अपनी माँ को बुलाने की कोशिश करने लगा | सारे Hyenas यह देखकर उस पर जोर जोर से हंस रहे थे और आपस में बात करने लगे की वाह! आज तो मज़ा आ जायेगा बड़ा ही लजीज भोजन मिलेगा आज करने को ……..
    
            अभी इनकी बात ही चल रही थी कि तभी चमेली भी वहा पहुँच गयी | Hyenas उसे चमेली को देख और खुश हुए कि क्या बात है 250 ग्राम के साथ 1 कि. ग्राम फ्री | आज तो शानदार दावत का लुफ्त उठाने मिलेगा ऐसा कह कर फिर जोर जोर से हँसने लगे |

             चमेली में कहा- ज्यादा दातं दिखाकर मत हंसो वरना महाराज शेर यहाँ आ जायेगे और तुम सबको खा जायेगे | सभी Hyenas ने आश्चर्य से पूंछा – महाराज शेर क्यों ?
चमेली ने कहा तुमको क्या लगता है – मै यहाँ अकेली अपने बच्चे के साथ इस खतरनाक जंगल में क्यों घूम रही हूँ, क्योकि महाराज शेर ने मुझे आदेश दिया है की तुम इस जगह को छोड़कर कही नही जाना जब तक कि मै यहाँ न आ जाऊं और यदि तुम लोगो ने मुझे या मेरे बच्चे को खाने का प्रयास किया तो राजा शेर तुम चारो में से किसी को नहीं छोड़ेगे |
तभी उनमे से एक Hyenas ने कहा राजा को कैसे पता चलेगा की हमने तुम्हे खाया है ?

             चमेली मुस्कुराकर बोली- तुम्हे क्या लगता है! राजा मूर्ख है | अरे ! पागल वो इतने बड़े जंगल के राजा है तो उन्होंने हम दोनों के ऊपर नज़र रखने के लिए किसी को नही रखा होगा क्या ? वो देखो हाथी को राजा उसे हम पर नज़र रखने को कह गये होगे | अगर फिर भी तुम हम दोनों को खाना चाहते हो तो तुम्हारी जैसी मर्ज़ी | 

            Hyenas यह सुन कर तोडा घबरा गये और आपस में कुछ बात करने लगे | हाथी जरूर यह सब शेर को बता देगा और हम सब मारे जायेगे | उनमे से एक Hyenas ने कहा फिर करे क्या ? दूसरा बोला अपनी जान बचाओ, खिसक लो यहाँ से यही सबसे अच्छा उपाय है | यह कह कर सारे Hyenas वहा से चले गये |

चमेली अपने बच्चे को सहलाती हुई गावं की ओर चल पड़ी |
वो दोनों कुछ कदम चले ही थी कि उनकी अचानक  नज़र शेर पर पड़ी |

            शेर भी उन्हें देख जोर से गुर्राया |
पलक झपकते ही शेर उनके सामने आ खड़ा हुआ | बच्चा यह देख सहम गया परन्तु चमेली ने धैर्य नही खोया वो डरी नही बल्कि साहस के साथ बोली- महाराज शेर रुक जाये हमे मत खाये, अन्यथा रानी शेरनी आपसे नाराज़ हो जाएगी. शेर बोला कहा हे शेरनी ? शेर बोला तुम अपनी सोचो शेरनी की नही | शेर यह बोल हँसने लगा | 

               बकरी  फिर से बोली महाराज में आपकी शेरनी की बात कर रही हूँ |
मेरी शेरनी ? हाँ
        क्या आप सोच सकते है मै अपने बच्चे को लेकर इस ख़तरनाक जंगल में पिकनिक मनाने तो आई नही होगी?


नहीं, महाराज में आपकी शेरनी के हाथो पकड़ी गयी हूँ और वो मुझसे यही रुकने को कह गयी है जब तक वो यहाँ नही लौटती है| आज, वो मेरा और मेरे बच्चे का ताज़ा गोस्त आपके लिए बनाना चाहती है |
शेर बोला – मै तुम पर भरोसा क्यों करू?


            चमेली बोली – मत करो भरोसा पर बाद में मुझे पर आरोप मत लगाना जब शेरनी आप पर गुस्सा हो जाये तो और अभी भी यदि आपको मुझ पर यकीन नही है तो इस कौये से पूछ लो जिसे शेरनी यहाँ मुझ पर नज़र रखने के लिए छोड़ गयी है | यदि किसी ने भी हमे नुकसान पहुचाया तो यह कौया शेरनी को सब जा कर बता देगा और वो बहुत गुस्सा हो जाएगी | 

                    यदि आप चाहो तो कोशिश कर सकते हो, परन्तु यह कौया किसी को नही छोड़ेगा | वह सब जा कर शेरनी को बता देगा क्योकि यह सब उनके आदेश पर ही हो रहा है | यह सुन कर शेर ने कौए को डराने की कोशिश की पर वह ज़रा सा भी नही हिला | 

      यह देख कर चमेली फिर बोली-
यह नही डरेगा महाराज क्योकि विश्वासपात्र कोया किसी भी कीमत पर शेरनी के आदेश का पालन करेगा | शेर समझ गया उसने कहा तुम सही हो बाकई यह कोया तुम पर नज़र रखे हुए है | यह ज़रा भी अपनी जगह से नही हिला , मेरे डराने पर भी |

    
                खेर शेरनी मेरे लिए ही तो डिनर बना रही है! यह कह कर शेर भी वहा से चला जाता है |
जैसे ही शेर वहा से जाता है चमेली और उसका बच्चा गाव की ओर जल्दी जल्दी चल पड़ते है | जितना तेज़ वो चल सकते है | पर मुसीबत अभी तली नही थी दोनों तोड़ा आगे चले ही थे की शेरनी की नज़र उन पर पड़ गयी और वह उन्हें देख जोर से गुर्रायी | यह देख बकरी का बच्चा माँ के पीछे छुप गया | बच्चे ने सोचा अब तो नही बचेगे गए काम से |
                वाह ! राजा शेर तुम्हे खा कर आज रात बहुत खुश होगे |
परन्तु चमेली यह सुन कर गबरायी नही | उसने फिर साहस और बुद्धि के उपयोग से बात घुमा दी |
चमेली बोली – रानी शेरनी मै आपके और महाराज शेर के बीच इस प्यार को देख कर बहुत प्रभावित हूँ | आप दोनों एक दुसरे को खुश करने के ही प्रयास करते रहते हो |


                शेरनी बोली – तुम यह क्या बोल रही हो ? तुम्हारा क्या मतलब है ?
आप हर रोज़ राजा शेर के लिए खाना बनाती है | आज महाराज शेर ने हमे पकड़ कर आपके लिए रात का भोजन खुद बनाने की योजना बनायीं है | शेरनी बोली तो शेर ने तुम्हे उसी समय क्यों नही मारा तुम अभी तक जिन्दा क्यों हो ? चमेली बोली क्योकि राजा शेर की योजना आपको बिलकुल ताज़ा डिनर कराने की है और उन्होंने कहा है कि मै अपनी शेरनी को एक दम फ्रेश डिनर की दावत दूँगा तुम्हे उसी समय मार कर | यह सुन कर शेरनी ने कहा क्या सही में यह सब शेर ने मेरे लिए प्लान किया है ?

    
                चमेली बोली हाँ महारानी यह सब आपके लिए ही है | बस आप जा कर गुफा में इंतजार करें |
शेरनी- ठीक है ! किंतु तुम लोग मेरे जाते ही यहाँ से भाग गये तब |
चमेली बोली – नहीं हम नही भागेगे | क्योकि राजा ने उस खरगोश को हम पर नज़र रखने के लिए कहा है | यदि हम यहाँ से भागे तो वो हमारा पीछा कर लेगा और इसकी सूचना शेर तक पहुच जायगी | शेरनी ने बकरी की बात का यकीन कर लिया |


            शेरनी बोली – ठीक है मै यहाँ से जाती हूँ और शेर को तुम्हारे पास भेजती हूँ | यह कह कर शेरनी भी वहा से चली गयी|
             चमेली और उसके बच्चे ने चारो ओर देखा और जोर से दोड़ना शुरू कर दिया | दोनों कही नही रुके जब तक की वो किसान के घर नही पहुच गये जहा वो रहते थे| बाकि बच्चे माँ और अपने भाई को वापस देख बहुत खुश हुए |

Moral Of This Story:-
·       कभी भी समस्या से डरना नही चाहिए |
·       हमेशा किसी भी मुश्किल का सामना साहस और अपने विवेक से करना चाहिए |
·       बचने की उम्मीद कभी नही छोड़नी नही चाहिए |
·       बड़ी से बड़ी समस्या का हल शांत होकर सोचने से निकल जाता है, इसलिए कभी भी समस्या देख घबराना नही चाहिए |

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